अपने 1 और पॉपुलर प्रोडक्ट को बंद करेगी Google, इसलिए उठाया जा रहा यह बड़ा कदम

अपने एक और पॉपुलर प्रोडक्ट को बंद करेगी Google, इसलिए उठाया जा रहा यह बड़ा कदम

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Google ने हाल ही में अपने दो लोकप्रिय उत्पादों को बंद करने का निर्णय लिया है: Chromecast स्ट्रीमिंग डिवाइस और लो-क्वालिटी एंड्रॉइड ऐप्स

Chromecast स्ट्रीमिंग डिवाइस:

2013 में लॉन्च किया गया Chromecast एक लोकप्रिय स्ट्रीमिंग डिवाइस था, जिसने उपयोगकर्ताओं को अपने फोन या कंप्यूटर से टीवी पर आसानी से कंटेंट स्ट्रीम करने की सुविधा दी। दस वर्षों में, इस डिवाइस की 10 करोड़ से अधिक यूनिट्स बेची गईं। हालांकि, तकनीक में निरंतर विकास और नए उत्पादों की उपलब्धता के कारण, Google ने Chromecast का उत्पादन बंद करने का निर्णय लिया है। मौजूदा इन्वेंट्री समाप्त होने के बाद, कंपनी इसे एक नए Google TV स्ट्रीमर से प्रतिस्थापित करेगी, जो उन्नत सुविधाओं के साथ आएगा।

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लो-क्वालिटी एंड्रॉइड ऐप्स:

Google ने Play Store पर उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने के लिए 31 अगस्त 2024 की समयसीमा तय की है, जिसके बाद निम्न-गुणवत्ता और गैर-कार्यात्मक ऐप्स को हटा दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और उच्च-गुणवत्ता वाले ऐप्स प्रदान करना है। डेवलपर्स को अपने ऐप्स की गुणवत्ता सुधारने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है, ताकि वे नए मानकों के अनुरूप हों और हटाए जाने से बच सकें।

इन दोनों कदमों से स्पष्ट है कि Google उपयोगकर्ता अनुभव को प्राथमिकता देते हुए अपने उत्पादों और सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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Google ने हाल ही में अपने एक लोकप्रिय उत्पाद, Chromecast स्ट्रीमिंग डिवाइस, का उत्पादन बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम तकनीकी प्रगति और बदलते उपभोक्ता आवश्यकताओं के मद्देनजर उठाया गया है।

Chromecast का विकास और सफलता:

2013 में लॉन्च किया गया Chromecast एक सस्ता और उपयोग में आसान स्ट्रीमिंग डिवाइस था, जिसने उपयोगकर्ताओं को अपने स्मार्टफोन, टैबलेट या कंप्यूटर से सीधे टेलीविजन पर सामग्री स्ट्रीम करने की सुविधा प्रदान की। इसकी सरलता और किफायती मूल्य के कारण, यह जल्दी ही लोकप्रिय हो गया और Google के सबसे सफल हार्डवेयर उत्पादों में से एक बन गया। दस वर्षों में, Chromecast की 10 करोड़ से अधिक यूनिट्स बेची गईं, जो इसकी व्यापक स्वीकृति को दर्शाती हैं।

उत्पादन बंद करने का निर्णय:

Google ने हाल ही में घोषणा की है कि वह Chromecast का उत्पादन बंद कर रहा है। कंपनी मौजूदा इन्वेंट्री को समाप्त करने के बाद, Chromecast लाइनअप को एक नए Google TV स्ट्रीमर से प्रतिस्थापित करेगी, जो उन्नत सुविधाओं के साथ आएगा। यह निर्णय तकनीकी विकास और उपभोक्ता आवश्यकताओं में बदलाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

भविष्य की दिशा:

Google का यह कदम संकेत देता है कि कंपनी अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को आधुनिक तकनीकों और उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुसार अद्यतन करने के लिए प्रतिबद्ध है। Google TV स्ट्रीमर के माध्यम से, कंपनी उपयोगकर्ताओं को और भी बेहतर स्ट्रीमिंग अनुभव प्रदान करने की योजना बना रही है।

इस प्रकार, Chromecast का उत्पादन बंद करने का निर्णय Google की रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जो तकनीकी प्रगति और उपभोक्ता आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

हम पिछले कुछ सालों से, इमेज के लिए लाइसेंस देने वाली इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं, ताकि Google Images से मिलने वाले कॉन्टेंट के लिए, लाइसेंस देने से जुड़ी ज़रूरी शर्तों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके. साल 2018 में, हमने IPTC इमेज से जुड़े अधिकारों के मेटाडेटा की सुविधा शुरू की; फ़रवरी 2020 में, हमने लाइसेंसेबल इमेज के लिए Schema.org और IPTC की मदद से, एक नए मेटाडेटा फ़्रेमवर्क का एलान किया. तब से, हमने देखा कि वेबसाइटें, इमेज प्लैटफ़ॉर्म, और हर तरह की एजेंसियां इस नए मानक को बड़े पैमाने पर अपना रही हैं. आज हम Google Images पर नई सुविधाएं लॉन्च कर रहे हैं. ये सुविधाएं, इमेज के लिए लाइसेंस देने की जानकारी को हाइलाइट करेंगी. साथ ही, ये उपयोगकर्ताओं के लिए, इमेज को ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करने के तरीकों को समझना आसान बनाएंगी.

यह क्या है?

जिन इमेज में लाइसेंस से जुड़ी जानकारी शामिल है वे नतीजों वाले पेज पर “लाइसेंसेबल” बैज के साथ दिखेंगी. जब कोई उपयोगकर्ता इमेज व्यूअर (इमेज चुनने पर दिखने वाली विंडो) खोलता है, तो हम कॉन्टेंट के मालिक या लाइसेंस देने वाले से मिला शर्तों वाला पेज और/या लाइसेंस की जानकारी देने वाला लिंक दिखाएंगे. उपलब्ध होने पर, हम उपयोगकर्ताओं को कॉन्टेंट के मालिक या लाइसेंस देने वाले से मिले ऐसे पेज का लिंक भी दिखाएंगे जहां से वे इमेज को पा सकते हैं.

हम ऐसी इमेज को ढूंढना भी आसान बना रहे हैं जिनमें लाइसेंस से जुड़ा मेटाडेटा शामिल है. हमने क्रिएटिव कॉमंस लाइसेंस के साथ-साथ व्यावसायिक या अन्य लाइसेंस फ़िल्टर करने की सुविधा चालू करने के लिए, Google Images में उपयोग के अधिकार के ड्रॉप-डाउन मेन्यू को बेहतर बनाया है

Google ने हाल ही में अपने एक और लोकप्रिय उत्पाद, Google Podcasts, को बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम कंपनी की रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को समेकित करना और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाना है।

Google Podcasts का परिचय:

Google Podcasts एक ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म था, जिसे उपयोगकर्ताओं को विभिन्न पॉडकास्ट सुनने की सुविधा प्रदान करने के लिए लॉन्च किया गया था। यह ऐप Google Play Store पर उपलब्ध था और इसे 50 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया गया था।

बंद करने का निर्णय और कारण:

Google ने 2 अप्रैल 2024 से अमेरिका में Google Podcasts को बंद करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद इसे धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी बंद किया जाएगा। कंपनी का यह कदम YouTube Music पर पॉडकास्ट सेवाओं को एकीकृत करने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे उपयोगकर्ताओं को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर संगीत और पॉडकास्ट दोनों का आनंद मिल सके।

उपयोगकर्ताओं के लिए मार्गदर्शन:

Google ने उपयोगकर्ताओं को अपने पॉडकास्ट सब्सक्रिप्शन्स को YouTube Music या किसी अन्य पसंदीदा पॉडकास्ट सेवा में स्थानांतरित करने के लिए जुलाई 2024 तक का समय दिया है। इसके लिए, उपयोगकर्ता Google Podcasts ऐप में उपलब्ध ‘एक्सपोर्ट सब्सक्रिप्शन’ विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।

 

ऑनलाइन की दुनिया में गूगल हर जगह है. हर रोज़ गूगल पर करोड़ों सवाल पूछे जाते हैं. गूगल दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक बन गई है.

गूगल शुरू में उसूलों और उस हिसाब से काम करने के दावे करती थी.

लेकिन इस साल अमेरिका की एक अदालत ने कहा कि बाज़ार में अपनी बड़ी मौजूदगी का गूगल कंपनी ग़लत फ़ायदा उठा रही है और इस कारण दूसरी कंपनियों का टिकना असंभव हो गया है.

कई लोगों का मानना है कि गूगल इतनी बड़ी और शक्तिशाली कंपनी हो गई है कि उसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है.

इस सप्ताह दुनिया जहान में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि क्या गूगल पर भरोसा किया जा सकता है?

गूगल का राज

गूगल इंटरनेट की दुनिया में इस कदर फैला हुआ है कि अब यह सोचना भी मुश्किल है कि गूगल से पहले इंटरनेट पर सर्च कैसी होती थी.

पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता पत्रकार डेविड वाइज़ ने गूगल को शुरू से फलते- फूलते देखा है और वो गगूल के इतिहास पर आधारित किताब ‘गूगल स्टोरी’ के लेखक भी हैं.

वो कहते हैं कि स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दो छात्र लैरी पेज और सर्गेइ ब्रिन इंटरनेट सर्च की क्वालिटी से ख़ुश नहीं थे इसलिए उन्होंने गूगल सर्च इंजन बनाया.

डेविड वाइज़ ने कहा, “90 के दशक के आख़िरी सालों के दौरान गूगल से पहले याहू सर्च और अल्टाविस्टा सर्च मौजूद थे. उन पर सर्च के रिज़ल्ट आने में काफ़ी समय लगता था और जो सर्च रिज़ल्ट आते थे उसमें विज्ञापन होते थे. विज्ञापन और रिज़्लट के बीच फ़र्क करना मुश्किल हो जाता था. इन दोनों ने गूगल सर्च इंजन बना कर इंटरनेट सर्च को तेज़ और विश्वसनीय बनाया. उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध वेब पन्नों को उनके महत्व के अनुसार रैंक किया या श्रेणी में ढाला जो पहले किसी ने नहीं किया था.”

उनका मक़सद कोई कंपनी बनाना या व्यापार करना नहीं था बल्कि केवल इंटरनेट पर सर्च को बेहतर बनाना था.

डेविड वाइज़ के अनुसार- वो इस सर्च इंजन को स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी को बेच कर अपनी पीएचडी पूरी करना चाहते थे, लेकिन उसे कोई ख़रीदना नहीं चाहता था. सभी ने कहा कि सर्च का कोई महत्व नहीं है. याहू और डिजीटल इक्वीपमेंट ने उनके सर्च इंजन को ख़रीदने से इंकार कर दिया. कोई उसे पांच लाख डॉलर में ख़रीदने को भी तैयार नहीं था. ना ही उसे और विकसित करने के लिए निवेश करने को राज़ी था.

मगर फिर सन माइक्रोसिस्टिम के संस्थापक एंडी बेक्टेलशाइन ने गूगल सर्च इंजन को आज़मा कर देखा और वो उससे काफ़ी प्रभावित हुए. उन्होंने लैरी पेज और सर्गेइ ब्रिन को एक लाख डॉलर का चेक थमा दिया.

डेविड वाइज़ कहते हैं कि व्यापार के लिए यह काफ़ी नही था इसलिए अधिक निवेश के लिए लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन सिलिकॉन वैली गए, जहां क्लाइनर पर्किंस ने एक करोड़ डॉलर और सुकाय कैपिटल कंपनी ने भी एक करोड़ डॉलर निवेश कर दिया.

लेकिन अब इस व्यापार को चलाने के लिए लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन को विज्ञापनों की ज़रूरत थी.

हालांकि कि वो शुरू से ही विज्ञापनों के ख़िलाफ़ थे.

डेविड वाइज़ ने बताया, ”जब लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन छात्र थे, तब वो विज्ञापनों को बहुत बुरा मानते थे और गूगल सर्च इंजन पर विज्ञापन नहीं देना चाहते थे. मगर विज्ञापनों के बिना व्यापार को आगे बढ़ाने की कोई अन्य योजना भी उनके पास नहीं थी.”

वो बोले, ”तब इसराइली उद्योगपति योसी बार्ड ने उन्हें कहा कि वो गूगल पेज पर एक नीली लाइन खींच दें जिसके एक तरफ़ सर्च के रिज़ल्ट होंगे और दूसरी ओर विज्ञापन होंगे. इससे लोग आसानी से रिज़ल्ट और विज्ञापनों में फ़र्क कर पाएंगे. उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल किया और इसी के साथ गूगल सर्च इंजन से आगे बढ़ कर एक बड़े उद्योग में तब्दील होने लगा.”

अब गूगल पेज के दाहिने हिस्से में आने वाले विज्ञापनों से कंपनी अरबों डॉलर कमाती है. अब विज्ञापन देने वाली कंपनियां यह भी जान सकती हैं कि कौन उनका विज्ञापन देख रहा है और उनमें से कितने लोग उनके उत्पाद ख़रीद रहे हैं.

गूगल कंपनी विज्ञापनों के ज़रिए सालाना 200 अरब डॉलर कमाती है.

डेविड वाइज़ ने कहा, “जब गूगल कंपनी शुरू की गयी थी तो उसका सिद्धांत साफ़ था कि बुराई से दूर रहें. वो ईमानदारी और नैतिकता के साथ व्यापार करना चाहती थी. उसका उद्देश्य लोगों तक सभी जानकारी उपलब्ध कराना था. लेकिन जैसे जैसे कंपनी बढ़ती गयी उसके लिए अपने नैतिक सिद्धांत पर अड़े रहना मुश्किल होता चला गया.”

निष्कर्ष:

Google अपने एक और लोकप्रिय प्रोडक्ट को बंद करने की योजना बना रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं में निराशा और आश्चर्य है। यह निर्णय कंपनी की रणनीति में बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संसाधनों को अधिक लाभकारी और नवीन सेवाओं पर केंद्रित करना है। इस कदम से उपयोगकर्ताओं को वैकल्पिक समाधान तलाशने होंगे, जो उनके अनुभव को प्रभावित कर सकता है। Google ने पहले भी कई प्रोडक्ट्स बंद किए हैं, और यह कदम प्रतिस्पर्धी बाजार में टिकने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी उपयोगकर्ताओं को सुचारु परिवर्तन के लिए समर्थन और जानकारी प्रदान करेगी।

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