Address : Central Waqf Council
9th Floor, Lok Nayak Bhawan,
Khan Market,
New Delhi – 110003
Role और Definition
Waqf एक इस्लामी कानून के तहत धार्मिक, परोपकारी या सामाजिक उपयोग के लिए किसी संपत्ति को स्थायी रूप से समर्पित करने की प्रक्रिया है। भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन केंद्रीय व राज्य Waqf Board द्वारा किया जाता है, जो Waqf अधिनियम 1995 के अंतर्गत स्थापित संस्थाएं हैं।
वर्तमान में भारत में लगभग 6 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक बताई जाती है। इन संपत्तियों में मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तान, मदरसे, दुकानें, खेत, और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं।
मुख्य समस्याएं
1. भ्रष्टाचार और गबन के आरोप
✅ संपत्तियों की हेराफेरी:
वक्फ संपत्तियों के गबन और अनियमित लीज समझौतों को लेकर समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि वक्फ बोर्ड के अधिकारी निजी कंपनियों या राजनैतिक दबाव में आकर बाजार दर से कम कीमतों पर लीज जारी कर देते हैं, जिससे वक्फ को करोड़ों की हानि होती है।
उदाहरण:
कर्नाटक Waqf Board घोटाला (2012) — रिपोर्ट में कहा गया कि करीब 2 लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्तियों का गबन हुआ।
✅ Transparency की कमी:
वक्फ बोर्ड के लेखा-जोखा में पारदर्शिता नहीं होती। ऑडिट रिपोर्ट समय पर नहीं दी जातीं, और अक्सर रेकॉर्ड्स अधूरे रहते हैं।
2. राजनैतिक हस्तक्षेप
राज्य सरकारें वक्फ बोर्ड की नियुक्तियों में अक्सर अपनी पसंद के लोगों को जगह देती हैं। यह राजनीतिकरण प्रशासन को प्रभावित करता है और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
उदाहरण:
कई राज्यों में बोर्ड के अध्यक्षों की नियुक्ति धर्म या जातीय समीकरणों के आधार पर होती है, जिससे शासन और नियंत्रण प्रभावित होता है।
3. प्रबंधन में अक्षमता
✅ स्टाफ की कमी:
अधिकतर राज्य वक्फ बोर्डों में कर्मचारियों की भारी कमी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, औसतन हर 3,000 संपत्तियों पर मात्र एक कर्मचारी है।
✅ तकनीकी आधुनिकीकरण की कमी:
वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण काफी पीछे है। “वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया” (WAMSI) जैसे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बेहद धीमी है।
✅ लीगल सेल की कमजोरी:
वक्फ बोर्ड के पास योग्य वकीलों की कमी है जिससे संपत्तियों पर अवैध कब्जों के मामले वर्षों तक कोर्ट में लटके रहते हैं।
4. संपत्तियों पर अवैध कब्जा
वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा बड़ी समस्या है। कई मामलों में स्थानीय माफिया या राजनैतिक संरक्षण प्राप्त लोग वक्फ की जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं।
केस उदाहरण:
दिल्ली, हैदराबाद, लखनऊ, भोपाल जैसे शहरों में कई कब्रिस्तानों और दरगाहों की जमीनों पर अवैध निर्माण हुआ है।
कई मस्जिदों की जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना दिए गए हैं।
5. धार्मिक उद्देश्यों से भटकाव
वक्फ संपत्तियां मूल रूप से धार्मिक और जनकल्याण के लिए होती हैं। लेकिन वर्तमान में इनसे होने वाली आमदनी का उपयोग स्कूल, अस्पताल या समाज सेवा में बहुत ही कम होता है। इसके स्थान पर प्रायः केवल प्रशासनिक खर्चों या अधिकारियों के लाभ पर खर्च हो रहा है।
कानूनी एवं प्रशासनिक पहलू
Waqf अधिनियम 1995:
यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों की देखरेख और नियंत्रण के लिए बनाया गया था। इसके तहत:
हर राज्य में वक्फ बोर्ड गठित किया गया।
सेंट्रल वक्फ काउंसिल की स्थापना हुई।
बोर्ड को संपत्ति की निगरानी, लीज, वसूली और रख-रखाव की शक्तियां दी गईं।
संशोधन (2013):
इसमें यह जोड़ा गया कि:
वक्फ संपत्ति को कोई भी “नॉन-वक्फ” कार्य के लिए अधिग्रहित नहीं कर सकता।
हर वक्फ संपत्ति का सर्वे जरूरी होगा।
वक्फ ट्रिब्यूनल का गठन किया गया जो विशेष अदालत के रूप में काम करता है।
समस्या:
इन प्रावधानों के बावजूद, कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
हाल के विवाद (2024-2025)
1. उत्तर प्रदेश वक्फ जांच समिति (2024)
योगी सरकार ने राज्य की वक्फ संपत्तियों की विशेष जांच कराई जिसमें पाया गया कि हजारों एकड़ जमीन पर बिना रिकॉर्ड के कब्जा हुआ है। इसके बाद कई वक्फ संपत्तियों पर फिर से सरकारी नियंत्रण की कोशिशें शुरू हुईं, जिसे लेकर समुदाय विशेष में असंतोष बढ़ा।
2. हैदराबाद में वक्फ बोर्ड बनाम GHMC (2024)
ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और वक्फ बोर्ड के बीच जमीन के स्वामित्व को लेकर टकराव हुआ। वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि कई सरकारी इमारतें वक्फ जमीन पर बनी हैं।
Solutions क्या हो सकते हैं?
✅ Digitalization:
हर Waqf संपत्ति का रिकॉर्ड जियो-टैगिंग और डिजिटल डेटा बेस के साथ उपलब्ध होना चाहिए। इससे पारदर्शिता और निगरानी दोनों बढ़ेगी।
✅ स्वतंत्र जांच एजेंसी:
सीबीआई या सीवीसी जैसी स्वतंत्र एजेंसियों से समय-समय पर वक्फ संपत्तियों की जांच होनी चाहिए।
✅ बोर्ड की स्वायत्तता:
राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करने के लिए वक्फ बोर्ड को संवैधानिक दर्जा या स्वायत्त संस्था का स्वरूप देना चाहिए।
✅ आमदनी का उपयोग:
वक्फ संपत्तियों से होने वाली आमदनी को शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों की मदद में खर्च करना चाहिए, जैसा कि वक्फ का मूल उद्देश्य है।
✅ लीगल तंत्र की मजबूती:
हर राज्य में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और कानूनी विवादों के निपटारे के लिए तेज़, सशक्त और सक्रिय लीगल सेल की आवश्यकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Waqf Board से जुड़ी समस्याएं केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं से भी जुड़ी हैं। वर्तमान समय में इसकी पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। अगर सही समय पर इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो इससे न केवल संपत्ति का नुकसान होगा, बल्कि समुदाय का विश्वास भी डगमगा सकता है।
इसलिए ज़रूरत है व्यापक सुधार की—कानूनी, तकनीकी, प्रशासनिक और नैतिक—ताकि वक्फ संपत्तियों का सदुपयोग हो सके और इसका लाभ उन लोगों तक पहुँचे जिनके लिए यह मूलतः निर्धारित की गई थीं।
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